बीकानेर: बीकानेर में खेजड़ी बचाओ आंदोलन ने राजस्थान की पर्यावरणीय चेतना को नई ऊँचाई दी है। 11 दिनों के ऐतिहासिक महापड़ाव के बाद 12 फरवरी 2026 को सरकार के लिखित आश्वासन पर यह आंदोलन समाप्त हो गया।
आंदोलन की शुरुआत
फरवरी 2026 की शुरुआत में सौर प्रोजेक्ट्स के नाम पर खेजड़ी के पेड़ों की अवैध कटाई के खिलाफ बीकानेर कलेक्ट्रेट पर महापड़ाव शुरू हुआ। बिश्नोई समाज के सैकड़ों सदस्यों, संतों और पर्यावरण प्रेमियों ने आमरण अनशन किया।
1730 के ऐतिहासिक खेजड़ली बलिदान की याद ताजा करते हुए प्रदर्शनकारियों ने पूरे राजस्थान में खेजड़ी संरक्षण कानून बनाने की मांग की। यह आंदोलन राजस्थान के राज्य वृक्ष खेजड़ी को बचाने के लिए एकजुटता का प्रतीक बन गया।
प्रमुख घटनाक्रम
- दिन 1-3: बीकानेर कलेक्ट्रेट पर महापड़ाव शुरू, सैकड़ों लोग अनशन पर।
- दिन 4-7: मंत्री केके बिश्नोई के आश्वासन के बाद जोधपुर-बीकानेर संभाग में अस्थायी रोक, लेकिन धरना जारी।
- दिन 8-11: महिलाओं की भव्य कलश यात्रा, 17 फरवरी को 5 लाख लोगों के सामूहिक अनशन की चेतावनी।
- लोकसभा और विधानसभा में मुद्दा गूंजा, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने दिया समर्थन।
सफल समापन और सरकारी आश्वासन
12 फरवरी की देर रात सरकार के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने खेजड़ी कटाई पर पूर्ण रोक का लिखित आदेश दिया। इसके बाद सभी अनशनकारियों ने अपना अनशन तोड़ा।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के हस्तक्षेप से आगामी विधानसभा सत्र में खेजड़ी संरक्षण के लिए कठोर कानून लाने का वादा किया गया है। सभी जिला कलेक्टरों को अवैध कटाई रोकने के सख्त निर्देश जारी हो चुके हैं।
पर्यावरण के लिए मिसाल
यह आंदोलन न केवल बीकानेर बल्कि पूरे राजस्थान के लिए पर्यावरण संरक्षण की मिसाल बन गया है। बिश्नोई समाज की इस एकजुटता ने साबित कर दिया कि जनता की आवाज के आगे कोई भी प्रशासन टिक नहीं सकता।
खेजड़ी जो राजस्थान की आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न अंग है, अब सुरक्षित रहेगी। यह जीत हर पर्यावरण प्रेमी के लिए प्रेरणादायक है।
✅ 11 दिनों का ऐतिहासिक महापड़ाव
✅ सरकार से लिखित आश्वासन
✅ खेजड़ी कटाई पर पूर्ण रोक
✅ विधानसभा में कानून बनाने का वादा
✅ बिश्नोई समाज की ऐतिहासिक एकजुटता
यह आंदोलन 1730 के खेजड़ली बलिदान की परंपरा को जीवंत करता है और आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है।
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